लेबर कोड 21 नवंबर 2025 से लागू हो गए। सुर्ख़ियाँ फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों की 1 साल वाली ग्रेच्युटी पर थीं, लेकिन ज़्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ा बदलाव दूसरा है: अगर आपका बेसिक, CTC का छोटा हिस्सा है, तो 50% वेतन नियम से ग्रेच्युटी 25–100% तक बढ़ सकती है। नीचे अपनी ग्रेच्युटी कैलकुलेट करें, पूरी गणना के साथ।
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 का 15/26 फॉर्मूला, जिसे सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (21 नवंबर 2025 से लागू) ने जारी रखा है। अपना आखिरी मासिक बेसिक वेतन + महंगाई भत्ता (DA) डालें।
यह केवल अनुमान है। 50% वेतन नियम 21 नवंबर 2025 से लागू है; पुरानी सेवा पर यह कैसे लागू होगा, इसके केंद्र और राज्य के अंतिम नियम अभी आने बाकी हैं। अपनी HR टीम से पुष्टि करें। ग्रेच्युटी पर टैक्स यहाँ नहीं जोड़ा गया है।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (धारा 53) पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 का नियम जारी रखती है: हर पूरे साल के लिए 15 दिन का वेतन, आखिरी वेतन के आधार पर। मासिक वेतन वालों के लिए:
ग्रेच्युटी = (बेसिक + DA) × 15 ÷ 26 × नौकरी के साल
8 महीने छह से ज़्यादा हैं, इसलिए 8 साल गिने जाएँगे। ₹40,000 × 15 ÷ 26 × 8 = ₹1,84,615। 7 साल 6 महीने होते तो सिर्फ़ 7 साल गिने जाते: ₹1,61,538। यानी छह महीने का निशान पार करने की कीमत यहाँ ₹23,077 है।
| स्थिति | न्यूनतम सेवा | साल कैसे गिने जाते हैं |
|---|---|---|
| स्थायी कर्मचारी (इस्तीफ़ा, रिटायरमेंट, बर्खास्तगी) | 5 साल लगातार | पूरे साल; आखिरी साल में 6 महीने से ज़्यादा = 1 साल |
| फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी | 1 साल (लेबर कोड) | सेवा की अवधि के अनुपात में |
| मृत्यु या विकलांगता | कोई शर्त नहीं | अनुपात में; मृत्यु पर नॉमिनी या वारिस को |
| वर्किंग जर्नलिस्ट | 3 साल | स्थायी कर्मचारियों की तरह |
नतीजा: यह लगभग पूरी तरह एक संख्या पर निर्भर है: कुल वेतन में आपके बेसिक + DA का हिस्सा। लेबर कोड में भत्ते कुल वेतन के 50% से ज़्यादा हों, तो ज़्यादा वाला हिस्सा "वेतन" में वापस जोड़ा जाता है। बेसिक आधे से कम है तो ग्रेच्युटी बढ़ेगी; 50% या ज़्यादा है तो नहीं।
| बेसिक + DA का हिस्सा | पुराना आधार | लेबर कोड आधार | बदलाव |
|---|---|---|---|
| 25% | ₹1,44,231 | ₹2,88,462 | +100% |
| 30% | ₹1,73,077 | ₹2,88,462 | +66.7% |
| 40% | ₹2,30,769 | ₹2,88,462 | +25% |
| 50% | ₹2,88,462 | ₹2,88,462 | +0% |
श्रम मंत्रालय के अनुसार कोड पिछली तारीख़ से लागू नहीं हैं, और पुरानी सेवा पर इनके असर के केंद्र व राज्य के अंतिम नियम अभी आने बाकी थे। इसलिए कैलकुलेटर में यह नियम एक विकल्प के रूप में है।
| बेसिक + DA | 5 साल | 7 साल | 10 साल | 15 साल | 20 साल | 25 साल | 30 साल |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ₹15,000 | 43,269 | 60,577 | 86,538 | 1,29,808 | 1,73,077 | 2,16,346 | 2,59,615 |
| ₹20,000 | 57,692 | 80,769 | 1,15,385 | 1,73,077 | 2,30,769 | 2,88,462 | 3,46,154 |
| ₹30,000 | 86,538 | 1,21,154 | 1,73,077 | 2,59,615 | 3,46,154 | 4,32,692 | 5,19,231 |
| ₹40,000 | 1,15,385 | 1,61,538 | 2,30,769 | 3,46,154 | 4,61,538 | 5,76,923 | 6,92,308 |
| ₹50,000 | 1,44,231 | 2,01,923 | 2,88,462 | 4,32,692 | 5,76,923 | 7,21,154 | 8,65,385 |
| ₹75,000 | 2,16,346 | 3,02,885 | 4,32,692 | 6,49,038 | 8,65,385 | 10,81,731 | 12,98,077 |
| ₹1,00,000 | 2,88,462 | 4,03,846 | 5,76,923 | 8,65,385 | 11,53,846 | 14,42,308 | 17,30,769 |
पूरी तालिका: India gratuity table · डेटा: CSV
कानून के दायरे वाली कंपनियों में: ग्रेच्युटी = आखिरी (बेसिक + DA) × 15 ÷ 26 × नौकरी के साल। आखिरी साल में 6 महीने से ज़्यादा हों तो पूरा साल गिना जाता है। कुल रकम ₹20 लाख तक सीमित है।
स्थायी कर्मचारियों को 5 साल की लगातार सेवा चाहिए। मृत्यु या विकलांगता में यह शर्त नहीं है। 21 नवंबर 2025 से लागू सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी 1 साल बाद अनुपात में ग्रेच्युटी पाते हैं।
मद्रास, केरल और दिल्ली हाई कोर्ट ने पाँचवें साल में 240 कार्य-दिवस को पूरा साल माना है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल साफ़ तौर पर तय नहीं किया है। इसलिए कंपनियाँ अलग-अलग तरीके अपनाती हैं।
कानून महीने को 26 कार्य-दिवस मानता है, इसलिए 15 दिन का वेतन = मासिक वेतन × 15 ÷ 26। कानून के दायरे से बाहर की कंपनियाँ अक्सर 15/30 इस्तेमाल करती हैं, जिससे करीब 13% कम रकम बनती है।
तभी, जब आपका बेसिक + DA कुल वेतन के आधे से कम है। उदाहरण: बेसिक 30% है तो ग्रेच्युटी के लिए वेतन 50% हो जाता है, यानी 66.7% बढ़ोतरी। 50% या उससे ज़्यादा है तो कोई बदलाव नहीं।
सरकारी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ्री है। निजी क्षेत्र में यह तीन रकमों में से सबसे कम तक टैक्स-फ्री है: मिली ग्रेच्युटी, ₹20 लाख (पूरे करियर की सीमा) और फॉर्मूला वाली रकम।
देय होने के 30 दिनों के भीतर। देर होने पर आप श्रम विभाग के कंट्रोलिंग अथॉरिटी के पास आवेदन कर सकते हैं।